Internet of things (IOT) kya hai

Internet of things (IOT) kya hai
Internet of things (IOT) kya hai

दोस्तों आज मैं आपको एक ऐसी एडवांस टेक्नोलॉजी के बारे में बताने जा रहा हूँ जिसके बारे में जानकार आप हैरान रह जायेंगे. इस तकनीक का नाम है Internet of things यानि IOT. अब आप सोच रहे होंगे आखिर ऐसा क्या है इस Technology में जो हैरान कर देने वाला हूँ.

एक छोटे से उदाहरण से समझते है कैसा महसूस होगा जब आप अपनी गाड़ी को गैराज में खड़ी करने के लिए जाते हैं और गैराज का सिक्योरिटी कैमरा आपकी गाड़ी को देखते ही आपके गैराज की शटर को खोल देता है और गैराज की लाइट्स अपने आप जल जाती हैं जैसे ही आप और जैसे ही आप गाड़ी खड़ी करके बाहर निकलते हैं आपके गैराज का सिक्योरिटी कैमरा लाइट्स को ऑफ कर देता है और गैराज को लॉक कर देता. हैरानी हो रही है ना सब कुछ बिलकुल HOLLYWOOD MOVIE जैसा महसूस हो रहा है जी हां आज के समय में यह सबकुछ संभव हो चुका है और इसे संभव है Internet of things यानि IOT ने.

दोस्तों इंटरनेट और कंप्यूटर तकनीकी युग का बहुत ही बड़ा हिस्सा बन चुका है आजकल तो हर किसी के पास स्मार्टफोन और इंटरनेट है जिसका इस्तेमाल कम नहीं होने वाला है. टेक्नोलॉजी की परिभाषा स्मार्टफोन, टीवी, स्मार्टवॉच तक ही सीमित नहीं रह गई है इसकी जगह आईओटी ने ले ली है तो आइये जानते हैं इंटरनेट ऑफ थिंग्स यानी कि आईओटी क्या है.

Internet of Things (IOT) kya hai

IOT का full form है Internet of things. इंटरनेट ऑफ थिंग्स एक तरह की नेटवर्किंग है जो आप के उपयोग के सभी गैजेट्स और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को एक दूसरे से कनेक्ट करती हैं. आसान भाषा में समझे तो IOT एक ऐसा कांसेप्ट है जिसमें सभी उपकरण जो ऑन और ऑफ स्विच से चलते हैं उन्हें इंटरनेट के माध्यम से कनेक्ट कर हम कोई भी कार्य करा सकते हैं. जैसे एक डिवाइस आपके घर, किचन आदि में मौजूद अन्य डिवाइसेस को आदेश देता है इस तरह से एक डिवाइस को इंटरनेट के साथ लिंक करके बाकी डिवाइसेस से अपने अनुसार कुछ भी कार्य कराया जा सकता है.

दूसरी भाषा में समझें तो IoT उपकरणों के बीच संचार को प्रोत्साहित करता है, जिसे मशीन-टू-मशीन (M2M) संचार के रूप में भी जाना जाता है। इस वजह से, भौतिक उपकरण जुड़े रहने में सक्षम हैं. यह पूरी तरह पारदर्शिता, कम अक्षमताओं और अधिक गुणवत्ता और एक्केयूरेसी के साथ उपलब्ध है।

आईओटी में इंटरनेट से जुड़े खुद की सोच समझ रखने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरण इंटरनेट के माध्यम से समय से पहले कुछ काम कर सकते हैं इसे तकनीक की दुनिया में नॉन स्क्रीन कंप्यूटिंग भी कहा जा रहा है तो कि यह उपकरण एक कंप्यूटर की तरह सोच तो सकते हैं लेकिन इनमें कंप्यूटर की तरह कोई स्क्रीन नहीं होती है.

Internet of Things काम कैसे करता है

दोस्तों इंटरनेट ऑफ थिंग्स से आप कई तरीके की सहायता ले सकते हैं यह आपका ख्याल भी रख सकता है और मुश्किल घड़ी में आपके बहुत सारे काम आ सकता है.

उदहारण के लिए मान लेते है आप अपने बिस्तर पर सो रहे हैं और अचानक हाथों की सेंसर वाली स्मार्ट वॉच को आपके हार्ड रेट में कुछ असामान्य लगता है तब यह डिवाइस आपको धीरे से उठाने के बदले जोरों से वाइब्रेट करने लगती है जिससे कि आपका ध्यान उसकी ओर आकर्षित हो सकें जिससे आपकी नींद टूट जाए. आपको समझ में नहीं आता है कि आपके साथ क्या हो रहा है आप अपने फोन की तरफ देखते हैं जिसके स्क्रीन पर आपको एक एक मैसेज मिलता है कि आपका ब्लड प्रेशर हाई है और साथ ही साथ आपको एक एस्प्रिन लेने की सलाह भी देता है. इतना ही नहीं वह सारे सिग्नल को रिकॉर्ड कर आपके डॉक्टर के पास भेज देता है जहाँ डाटा को चेक कर इलेक्ट्रॉनिकली आपातकालीन मेडिकल टीम को आपके पते पर भेज दिया जाता है. जिससे आपको उचित समय पर मेडिकल ट्रीटमेंट दिया जाता है जिससे किसी भी रोग को गंभीर होने से पहले ही उसका उपचार हो जाता है.

[block]1[/block] of Things का अविष्कार :

सन 1982 में कार्नेगी मेलन यूनिवर्सिटी की एक लैब में शोधकर्ताओं ने कोक मशीन को इंटरनेट से जोड़ा था या मशीन अपने भीतर रखे गए पेय पदार्थ की बोतलों की संख्या का हिसाब एवं उसके तापमान को भी मापने सक्षम थी. यह अपने आप में सबसे पहला इंटरनेट कनेक्टेड डिवाइस था.

आईओटी शब्द का पहली बार अविष्कार पी एंड जी, जो कि बाद में MIT ऑटो आईडी सेंटर में केविन असटन के द्वारा सन 1999 में किया गया. रिसर्च आर्टिकल जिसमें आई ओ टी के बारे में बताया गया था उसको पहली बार नार्वे में नार्डिक रिसर्चर्स की कॉन्फ्रेंस में जून 2002 में प्रस्तुत किया गया था. जोकि सन 2008-09 में बहुत ही अधिक चर्चित रहा.

कौन-कौन सी device IOT से कनेक्ट हो सकती है :

दोस्तों जैसा कि Internet of things kya hai के टॉपिक में बताया था कि कोई भी device जो ऑन और ऑफ हो सकती हो और उसमे कनेक्टिविटी कि सुविधा हो वह IOT से कनेक्ट हो सकती है.

Internet Of Things की मदद से आप सिक्योरिटी, गार्डनिंग, म्यूजिक, ऑटोमोबाइल, फ्रिज, एसी, टीवी, स्मार्ट वॉच, स्मार्ट सेंसर्ड वॉच, सिक्योरिटी कैमरा आदि जैसी अनगिनत डिवाइसेस जिनमे कनेक्टिविटी की सुविधा उपलब्ध हो और वह ऑन-ऑफ होते हो तो उनको Internet Of Things से कनेक्ट कराके कई काम करा सकते है.

इन्टरनेट ऑफ़ थिंग्स के लक्षण :

जब हम इन्टरनेट ऑफ़ थिंग्स के लक्षणों बारे में जानते है तो हमें पता चलता है यह कई चीजों पर आधारित होता है. जो इसके कार्य करने उसे समझने की खूबियाँ प्रदान करता है.

Intelligence :

IoT Algorithm और calculation, सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर के combination के साथ आता है. जो इसे स्मार्ट और बुद्धिमानी बनाता है. IoT में व्यापक बुद्धिमत्ता होती है जो अपनी क्षमताओं को बढ़ाती है जो किसी विशेष स्थिति में बुद्धिमानी से जवाब देने के लिए चीजों की सुविधा प्रदान करती है और विशिष्ट कार्यों को पूरा करने में उनका समर्थन करती है

Connectivity

कनेक्टिविटी नेटवर्क एक्सेसिबिलिटी और कम्पैटिबिलिटी को सक्षम बनाती है. डिवाइस सेंसर का उपयोग करके जुड़े हुए हैं जो इंटरनेट का उपयोग करके संवाद करते हैं. यदि उद्योग की मशीनें केंद्रीय सर्वर से जुड़ी हैं तो यह मशीने कनेक्टिविटी कि वजह केंद्रीय सर्वर को डेटा भेजती रहती हैं. इसी कनेक्टिविटी के कारण बाजार में स्मार्ट डिवाइसेस कि मांग बहुत तेजी से बढ़ रही.

Sensing

Sensing का अर्हथ सेंस यानि समझने की क्षमता ठीक इसी प्रकार इन्टरनेट ऑफ़ थिंग्स(IOT) का एक एक गुण Sensing हैं. किसी भी स्मार्ट device के माध्यम से हम किसी भी वास्तु का temperature नापना, हार्ट रेट नापना, वस्तुओं कि image से उनकी गिनती कर लेना यह सब सेंसिंग ही है जो इसे और अभी अधिक स्मार्ट बनाता है.

Security:

IoT उपकरणों को स्वास्थ्य संबंधी डेटा जैसे संवेदनशील जानकारी को आगे प्रसारित करने की आवश्यकता हो सकती है, इसलिए डेटा सुरक्षा महत्वपूर्ण हो जाती.

कई डिविसेस को एक साथ कैसे मैनेज कर सकते है ?

दोस्तों यहां पर हमारे मन में एक छोटा सा कन्फ्यूजन हो सकता है कैसे इंटरनेट ऑफ़ थैंक्स की मदद से हम कई सारी डिवाइसों को एक साथ में मैनेज कर सकते हैं दोस्तों आपको शायद पता हो कि प्रत्येक डिवाइस जिसमें कनेक्टिविटी की सुविधा होती हैं उसका एक आईपी एड्रेस (I.P address) भी होता है जब हम किसी पर्टिकुलर डिवाइस को इंटरनेट ऑफ थिंग्स के माध्यम से ऑपरेट करते हैं तो वह उस डिवाइस से कनेक्ट करता है जिस डिवाइस को हम कमांड भेजते है. उदाहरण के लिए हम अपने एसी को ऑपरेट करना चाहते हैं और हमने अपने एपी की आईपी ऐड्रेस को एक नाम दे रखा है जो है एसी अब जब हम ऐसी को कमांड भेजते हैं एसी पर भेजे गए कमांड उसके आईपी ऐड्रेस से कनेक्ट करके उसको ऑपरेट करते हैं.

इन्टरनेट ऑफ़ थिंग्स के फायदे:

  1. एक ऐसी तकनीक जो हमारी भाग दौड़ भरी जिंदगी में सिर्फ हमारे एक इशारे पर हमारे बहुत से काम कर दे तो यह एक फायदे की ही बात है. हमारे ऑफिस से घर पहुचने से पहले हमारे रूम एक AC ऑन कर दे ताकि जब हम अपने रूम में जाए तो वह ठंडा हो चुका हो.

2. इसी तरह के बहुत से उदाहरण है जो internet of things की सहायता से हमारे दैनिक जीवन कि कठिनाइयों को कम सकते है. मन लीजिये आप ऑफिस चले जाते है और अपने टीवी को बंद करना भूल जाते है तो ऐसी स्थिति में सिर्क कमांड की मदद से आप अपने घर में चल रहे टीवी को ऑफिस में बैठे बैठे बंद कर सकते है.

3. यह आपका समय और पैसा बचाने के साथ साथ आपके कई काम एक साथ कर सकता है.

4. IoT सेवाएं सेंसर और वीडियो कैमरों के साथ जुड़ा हुआ होता है. उपकरण सुरक्षा को सुनिश्चित करने और भौतिक खतरों से बचाने के लिए कार्यस्थल की निगरानी में मदद करती हैं। IoT कनेक्टिविटी समस्याओं को तुरंत हल करने के लिए कई टीमों का समन्वय करती है।

5. उत्पादकता किसी भी व्यवसाय की लाभप्रदता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। IoT कर्मचारियों के लिए समय पर प्रशिक्षण प्रदान करता है, श्रम दक्षता में सुधार करता है, और संगठनात्मक उत्पादकता को बढ़ाते हुए कौशल का बेमेल कम करता है।

6. IoT नए व्यावसायिक अवसरों के लिए द्वार खोलता है और कंपनियों को उन्नत व्यावसायिक मॉडल और सेवाओं द्वारा विकसित नई राजस्व धाराओं से लाभान्वित करने में मदद करता है. IoT संचालित नयी खोजों से मजबूत व्यावसायिक मामलों का निर्माण करते हैं, बाजार में समय कम करते हैं और निवेश पर वापसी बढ़ाते हैं.

इन्टरनेट ऑफ़ थिंग्स के नुक्सान:

अगर नुकसान की बात की जाए तो हर सिक्के के दो पहलु होते है. अगर किसी तकनीक के कुछ फायदे है तो नुकसान भी. आज तक ऐसा कोई भी अविष्कार नहीं हुआ जिसने सिर्फ लाभ ही किया हो नुक्सान नहीं. तो आइये आईओटी से होने वाले नुकसान के बारे में भी जान लेते है.

सुरक्षा: इस तकनीक का सबसे बड़ा नुकसान सुरक्षा को लेकर है अधिकतर अपराध इंटरनेट के जरिए हो रहे है और आईओटी इंटरनेट से ही जुड़ा हुआ है इसमें भी वायरस का अटैक हो सकता है.. हैकर्स आपकी व्यक्तिगत जानकारी का दुरुपयोग कर सकते है और आपको आर्थिक नुकसान भी पंहुचा सकते है.

गोपनीयता: उपयोगकर्ता पर सक्रिय भागीदारी के बिना भी IoT प्रणाली पर्याप्त मात्रा व्यक्तिगत डेटा प्रदान करती है. ऐसे में सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा हो जाता है.

जटिलता: IoT प्रणाली के लिए तकनीक को डिजाइन करना, विकसित करना और बनाए रखना काफी जटिल है. उदाहरण के लिए आप और आपके पति या पत्नी दोनों को संदेश मिल सकता है कि दूध खत्म हो गया है और आप दोनों लोग दूध खरीद लाते है.

इन्टरनेट ऑफ़ थिंग्स उपकरण के उदहारण:

जब इतना कुछ जान लिए तो आइये कुछ ऐसे devices के बारे में भी जान लेते है जो इन्टरनेट से कनेक्ट हो जाते है और आपकी जिंदगी को आसान बना सकते है.

Nest Learning Thermostat:

यह इंटरनेट से Connected Thermostat है. यह आपके घर के तापमान को Automaticaly Maintain कर देता है. यह आपके घर के तापमान नापता है और घर तापमान को आपके द्वारा निर्धारित किये गए तापमान पर सेट कर देता है.

Kolibree Smart Toothbrush:

Internet of Things एक बड़ा उदाहरण है Kolibree Smart Toothbrush. Kolibree आपके स्मार्टफ़ोन से कनेक्ट होता है और बच्चों और वयस्कों दोनों के लिए अच्छी ब्रश करने की आदतों को प्रोत्साहित करता है. जब इस टूथब्रश को ऑन करते है तो आपके mobile पर एक game स्टार्ट हो जाता है जिसे ब्रश करते हुए खेला जा सकता है. है ना मजेदार device.

Petnet Smart Pet Feeder:

Petnet Smart Pet Feeder आपको अपके पालतू जानवर कुत्ते या बिल्ली के लिए सबसे अच्छे प्रकार के भोजन की गणना करने में मदद करता है साथ ही उन्हें कितना खाना चाहिए और यहां तक कि जब आप बाहर होते हैं तो पालतू भोजन की डिलीवरी भी करते हैं. आप अपने स्मार्टफ़ोन के माध्यम से स्मार्ट फीडर को नियंत्रित कर सकते हैं और घर से दूर होने पर भी अपने पालतू जानवरों के भोजन की खपत की निगरानी कर सकते हैं.

निष्कर्ष:

इंटरनेट ऑफ थिंग्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का ही एक आरंभिक रूप है जो आने वाले समय में बहुत ही क्रांतिकारी परिवर्तन लाने वाला है. यह हमारे बहुत सारे भागम भाग के जीवन से मुक्ति दिला सकता है और साथ ही जैसा कि आप जानते हैं हर अच्छी चीज के पीछे एक बुराई छुपी होती है या फिर हम ऐसा भी कह सकते हैं विकास का दूसरा रूप विनाश है ऐसे में जब विकास अपने चरम पर पहुंच जाता है तो विनाश का द्वार नजदीक हो जाता है. तकनीकी भागम भाग में आज पर्यावरण पूरी तरीके से असंतुलित हो चुका है लेकिन हमारी मजबूरी है जो आज का युग है उसके हिसाब से जीना पड़ता है. और भविष्य क्या होगा यह तो भविष्य ही जाने अपना काम तो सिर्फ जानकारी देना है.

आशा करता हूँ दोस्तों आपको मेरे द्वारा Internet of things (IOT) kya hai कि जानकारी अवश्य पसंद आई होगी. मैं ऐसी रोचक जानकारिय लेकर आता रहूँगा. जय हिन्द जय भारत

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