ishq ke kide – इश्क के कीड़े hindi kavita

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इश्क के कीड़े – हिंदी कविता

love cartoon

 

आड़ से वो फेक पत्थर खिलखिला कर आ गए

“मूड” था लड़ने का उनसे पर हम दिल मिला के आ गए  |

जब मिली उनसे नजर तो दिल में खड़-बड़ मच गयी

इश्क के जितने थे कीड़े बिलबिला कर आ गए |

देख उनको दूर से ही बस निकल जाते थे हम

बात जब हमने न की वो तिलमिला कर आ गए |

हम पहुच कूचें में उनके भाई से ही भिड़ गए

हम पिटे तो दिन में तारे झिलमिला कर आ गए |

देखकर सेहत मेरी टेलर ने समझा माफिया

फिर तो सारे घर के कपडे सिलसिला कर आ गए |

पाँच वर्षो तक तो जिनका हुक्म ही क़ानून था

भेड़िये वो आज अपनी दुम हिला कर आ गए |

चोर डाकू माफिया जो “टॉप” के थे देश में

हम गए संसद सभी से मिलमिला कर आ गए |

प्रेमियों में जब हुआ झगड़ा बुलाये हम गए

हम सभी को इनका उनका दिल दिलाकर आ गए |

थी हमें लम्बे समय से घुड़सवारी कि ललक

किन्तु थोड़ी देर में हम छिल-छिला कर आ गए |

फल जो भेजे थी नई माशूक को तो ये हुआ

सड़ गए कुछ और बाकि पिलपिला कर आ गए |

है जगह कम और “क्या है” भीड़ ज्यादा देश में

फिर भी सारे लोग देखो हिलहिला कर आ गए ||

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