Me Too Campaign Kya hai? Me too in hindi #metoo

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Me Too Campaign Kya hai Me too in hindi
Me Too Campaign Kya hai Me too in hindi

Me Too Kya hai? Me too in hindi : नमस्कार दोस्तों एक बार फिर से आप सभी का kyahai.in पर हार्दिक स्वागत है. Social media पर इस समय Me Too Campaign बहुत तेजी से वायरल हो रहा है आज हम उसी मी टू campaign के बारे में जानेगे कि Me Too Campaign Kya hai? Me too in hindi.

हमारे देश में रोज हजारो महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार हो रहे है ऐसे में जब नामी गिरामी हस्तियों के नाम इसी क्रम में जुड़े हो तब यह और भी अधिक गंभीर हो जाता है. क्यूँकि ऐसे नामी गिरामी लोगों को बहुत सारे लोग अपना आदर्श भी मानते है लेकिन जब उनकी सच्चाई समाज के सामने आती है तो हम एक बार सोचने को मजबूर हो जाते है कि दुनियां में कैसे कैसे लोग पड़े है. Me too campaign आज ऐसे लोगों की सच्चाइयों को सामने ला रहा है.

आइये सबसे पहले जानते है #Metoo kya hai? और me too campaign की शुरुआत कब हुई थी ? Me too in hindi

Me Too Campaign Kya hai? Me too in hindi

Me too in hindi का अर्थ होता है “मैं भी” लेकिन यहाँ पर me too का मतलब यौन उत्पीडन या महिलाओं से दुर्व्यवहार का है.  #Metoo campaign की शुरुआत सन 2006 में अमेरिकी सिविल राइट्स एक्टिविस्ट तराना बर्क ने की थी. लेकिन यह campaign सुर्ख़ियों में तब आया जब अमेरिकी एक्ट्रेस एलिसा मिलानो ने अपने साथ हुए यौन उत्पीड़न के बारे में लिखते हुए उन्होंने #MeToo नाम का हैश टैग का इस्तेमाल किया। एलिसा का यह ट्वीट देखते ही देखते वायरल हो गया और 1 दिन के भीतर ही 2 लाख से ज्यादा लोगों ने इसे ट्वीट कर दिया.

#MeToo Campaign in India :

भारत में #Metoo campaign तब सुर्ख़ियों में आया जब तनुश्री दत्ता ने नाना पाटेकर पर एक फिल्म की शूटिंग के दौरान अपने साथ किये गए दुर्व्यवहार को लेकर आरोप लगाये थे. एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू के दौरान तनुश्री ने बताया कि साल 2008 में फिल्म ‘हॉर्न ओके प्लीज़’ की शूटिंग के दौरान नाना पाटेकर ने उनका यौन उत्पीड़न किया था. भारत में #Metoo campaign के सुर्ख़ियों आने के बाद से बॉलीवुड से लेकर राजनीती तक के लोगों के ऊपर इस तरह के आरोप लग चुके है.

भारत में यौन उत्पीडन को लेकर कई कड़े कानून है लेकिन उसके बावजूद भी महिलाओं के होने वाले उत्पीडन में किसी तरह की कोई भी कमी नहीं आ रही है. आज जब #metoo campaign social media के माध्यम वायरल हो रहा है तब बड़े बड़े रसूख दार लोग इसकी चपेट में आ रहे है. अभी तक भारत में राजनीती, बॉलीवुड, लेखक, प्रोडूसर से लेकर बड़ी बड़ी हस्तियों के ऊपर आरोप लग चुके है जिनमे से कुछ के नाम इस प्रकार है

एक्टर आलोक नाथ, नाना पाटेकर, पीयूष मिश्रा, रजत कपूर, रोहित रॉय, डायरेक्टर सुभाष घई, विकास बहल, साजिद खान, सुभाष कपूर, प्रड्यूसर गौरांग दोषी, नाटककार किरण नागरकर, कमीडियन उत्सव चक्रवर्ती, गुरसिमरन खंबा, अदिति मित्तल, सिंगर कैलाश खेर, अन्नू मालिक, अभिजीत भट्टाचार्य, वैरामुत्तू रामासामी, राइटर चेतन भगत, मॉडल जुल्फी सईद, पत्रकार एमजे अकबर, विनोद दुआ, केआर श्रीनिवास, मचंद्रगौतम अधिकारी, मयंक जैन, सिद्धार्थ भाटिया, मेघनाद बोस, उदय सिंह राणा, सिद्धांत मिश्रा और सताद्रु ओझा ये वो नाम है जिनके खिलाफ महिलाओं ने #metoo campaign के माध्यम से यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए है.

जब कोई आम आदमी किसी महिला के खिलाफ अत्याचार करता है तो यही नामी गिरामी लोग media के माध्यम से महिला उत्पीडन के खिलाफ जोर शोर से हिस्सा लेते है लेकिन जब ऐसे नामी गिरामी लोगों पर ऐसे आरोप लगते है तो पर उपदेश कुशल बहुतेरे की कहावत चरितार्थ हो जाती है.

आज के दौर में जहाँ महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कन्धा मिलकर चल रही है वहां इस तरीके की घटनाएँ हमें सोचने पर विवश कर देती है कि हमारा समाज आज किधर जा रहा है.

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