हैकर्स से कैसे बचाएं पेटीएम, मोबिकविक और फ्रीचार्ज को

अगर आप Paytm, Mobikwik, या Freecharge जैसी ewallets app का प्रयोग कर रहे है तो आपको कुछ सावधानियां बरतनी होगी नहीं तो आप हैकर्स के निशाने पे आ सकते है | विमुद्रीकरण के बाद जहा लोग तेजी से कैश लेश हो रहे है वही हैकर्स भी अपना सॉफ्ट टारगेट तलाश रहे है | तो ऐसे में आपको कुछ सावधानियों का प्रयोग करना होगा |

tips-to-protect-ewallets-from-hackers-paytm-banking-walletsआपको अपने इन ई-वॉलेट को हैकर्स से उसी तरह सावधान रखना होगा, जिस प्रकार आप पर्स को जेबकतरों की नज़र से दूर रखते हैं। ये हैकर्स बहुत ही स्‍मार्ट और शातिर होते हैं और आपकी थोड़ी सी लापरवाही को ही अपना हथियार बना लेते हैं। आइए जानते हैं कि आप किस प्रकार इन हैकर्स से अपने पेटीएम, मोबिकविक और फ्रीचार्ज को बचा सकते हैं |

एप लॉक एप का इस्‍तेमाल करें : अगर आप ई-वॉलेट का इस्‍तेमाल करते हैं तो एप लॉक करने वाली एप का इस्‍तेमाल करें। इसके लिए आपको प्‍लेस्‍टोर पर जाकर बेस्‍ट रेटिंग वाली सिक्‍योरिटी एप का चयन करना चाहिए और उसे डाउनलोड करने के बाद इंस्‍टॉल कर लेना चाहिए। इससे आपकी एप पर हमेशा लॉक रहेगा और अगर कोई फीजिकली उसे हैक करने की कोशिश करेगा तो लॉक लगे होने की वजह से उसे सफलता नहीं मिलेगी।

पब्लिक वाई-फाई का इस्‍तेमाल न करें : अगर आप ई-वॉलेट का इस्‍तेमाल करते हैं और आपको कभी भी इससे कोई काम करने की जरूरत पड़ती है तो वहां कैच करने वाले पब्लिक वाई-फाई का इस्‍तेमाल कतई न करें। वैसे भी पब्लिक वाई-फाई से बचना चाहिए, इनसे स्‍मार्टफोन के हैक होने की संभावना होती है।

थर्ड पार्टी कीबोर्ड का इस्‍तेमाल न करें : कभी भी ई-वॉलेट को इस्‍तेमाल करने के दौरान किसी भी थर्ड पार्टी कीबोर्ड का प्रयोग न करें। हो सकता है कि ये किसी हैकर के द्वारा बनाई गई एप हो, जिससे उसे आपके द्वारा कीबोर्ड पर टाइप किए जाने वाले वर्ड से समझ में आ जाये कि आपका पासवर्ड क्‍या है।

 जेलब्रोकन फोन या एप के इस्‍तेमाल से बचें : ई-वॉलेट का इस्‍तेमाल करने वाले लोग जेलब्रोकन फोन या एप के माध्‍यम से कभी भी ई-वॉलेट को इस्‍तेमाल न करें। इससे उनकी जानकारी लीक हो सकती है और उसका मिसयूज हो सकता है। कई लोग लोभ में आकर ऐसा कर लेते हैं और बाद में उनकी सिक्‍योरिटी में सेंध लगने की वजह से फ्रॉड हो जाता है और उनको इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है।

ई-मेल से लिंक कर लें ई-वॉलेट : आप ई-वॉलेट को बनाते समय ही अपनी मेल आईडी को उसके साथ लिंक कर लें। ऐसा करने से आपके द्वारा किए जाने वाले हर ट्रांसजेक्‍शन की डिटेल मेल में आ जाएगी और कोई भी गैरकानूनी गतिविधि होने पर आपको उसका पता भी चल जाएगा। इस प्रकार आप अपने ई-वॉलेट को सुरक्षित रख सकते हैं और हैकर्स की नज़र से बचा सकते हैं।